कभी लोग मुझे कहते थे कि मैं बातों को सबसे ज्यादा घुमाती हूं कभी सीधी बात नहीं कहती हूं, लेकिन तुमसे मिलने के बाद हमें लगा ना!! कोई है जो हमसे भी ज्यादा बातों को घुमा लेता है। तुम्हें कोई परेशानी होती है तो सीधे क्यों नहीं कह पाते हो इतना घुमाते क्यों हो। उनकी बातों ने जैसे थोड़ी देर के लिए चेहरे पर चुप्पी सी ला दिया था, उनकी बातों में कहीं न कहीं एक सच्चाई सी थी, सच में हमनें तो अब बातों को घुमाना सीख लिया था, लेकिन इसकी कई वजहें भी थी। कई लोग थे ज़िंदगी में जो हमसे अक्सर ये दावा किया करते थे कि वो हमें बेहतर समझते हैं लेकिन जब वक्त सच में समझने का आया तो सबने अपने-अपने हिसाब से समझना शुरु कर दिया। एक बात कहूं तो एक वो दिन था और एक आज का दिन है, उस के बाद से हमें अपनी बात को किसी से कहने में डर लगने लगा कि हम कैसे किसी से कहें, कैसे किसी को बताएं, वो वक्त वो सच डरावना था, जब अक्सर नींद की ख्वाहिश में आंखें हमेशा खुली ही रहती थी, कई बार कोशिश किया था हमनें, जब कोई ख़ास हुआ तो उसे बताने का कि हम कैसें हैं, लेकिन किसी को समझ में नहीं आती है ना तो कोई समझना नहीं चाहता है, और तो और कभी-कभी ...
Comments
Post a Comment