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उम्र का पड़ाव...
बहुत दिनों बाद सुकून
मिला है जैसे। एक चिड़िया सा बोझ था मन में लेकिन अब नहीं है। बहुत दिनों से लग रहा था पता नहीं कहां कैद हैं, लेकिन अब आज़ाद महसूस हो रहा है। अब डर नहीं लगता है, लगता है ज़िंदगी को एक नया पड़ाव मिल गया है। नहीं कोई खुशी की बात नहीं है, लेकिन आज जब घर लौटा तो मन बड़ा हल्का लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे शरीर हवा को महसूस कर रहा है, मन में एक लम्बी श्वास पहले से ज्यादा ठंडी और सुख देने का एहसास करा रही है। ऐसा पहले भी हुआ है और जब भी हमें ऐसा महसूस होता है कहीं न कहीं हम उम्र के एक पड़ाव को पार कर रहे होते हैं, हां तो आज भी कुछ वैसा ही है।
आज समय भी बड़ा शांत होकर मेरी बातें को सुन रहा है। हो भी क्यों ना एक अरसे से हमनें समय को भी समय नहीं दिया। कभी-कभी लगता है हम इतने व्यस्त कब हो गए ज़िंदगी में कि समय का भी साथ छोड़ दिया था हमनें, लेकिन आज नहीं, आज वो मेरे साथ बैठकर मेरी सारी बातें सुनेगा, मेरे सारे सवालों के जवाब भी देगा, मेरे पास भी आज उसके सारे सवालों के जवाब हैं। आज हम समय से आंखें मिलाकर ये बोल पा रहे हैं, कि हम तुमसे दूर नहीं हुए ना होना चाहते हैं बस तुम्हारे साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलना चाहतें हैं। एक अरसा हो गया है जब हम तुम्हारे साथ बैठे ही नहीं। कितना कुछ है कहने को। कभी कभी लगता है हम इंसान बड़े ही अजीब प्राणी हैं, वक्त ही नहीं निकाल पाते हैं एक दूसरे के लिए, हमें लगता है हम तुमसे प्यार करते हैं लेकिन अपने सुविधानुसार, हम तुम्हारी परवाह करते हैं लेकिन अपने सुविधानुसार। हमनें दूसरों के बारे में सोचना या परवाह करना बंद कर दिया है।
मैं ये देखता हूं कि मानवता कुछ ही जगहों तक सीमित हो गईं हैं। बनावटी दुनियां (सोशल मीडिया) में ही जीने लगे हैं हम। कोई किसी से बात ही नहीं करता है, कोई किसी की सुनना ही नहीं चाहता है। आज के दौर में इंसान इतना अकेला हो गया है, कि अब वो केवल ख्यालों की दुनियां में जीने लगा है। लेकिन मैं वैसे नहीं जीना चाहता हूं, एक बात है जो आजमैं तुमसे कहना चाहता हूं, कि अगर तुम मुझसे मिलना चाहोगे, मैं मिलूंगा बात करना चाहोगे बात करूंगा। मैं तुमको हर वो जगह दिखूँगा जहां तुम मुझे देखना चाहते हो, जैसा देखना चाहते हो, तुम्हारी तरह। ऐसा नहीं है कि मेरी कोई ख्वाहिश नहीं है लेकिन अगर तुम मेरी तरह मुझे मिलोगे तो। मैं ये नहीं चाहता हूं तुम मजबूर होकर मेरे साथ चलो, लेकिन जब भी चलना ये ज़रूर याद रखना कि समय कि धारा के साथ चलना। शायद हम दोनों मिलकर एक ऐसा शहर बनायेगें, एक ऐसी इबारत लिखेंगे जिसको दुनियां पढ़ने और जानने के लिए व्याकुल रहेगी, जहां हम-तुम समय के साथ चलेंगे, बिछड़ेंगे नहीं।
aapkey shabdon mein jaadu hai
ReplyDeleteBahut badi baat kah diya, Dost.
Deleteदिल को छूने वाली बात
ReplyDeleteThank you ❤️
Deleteबहुत शानदार और सच्ची बात
ReplyDeleteShukriya 😀
Deleteबेहतरीन
ReplyDeleteUmeed hai aage bhi likhne ki koshish karenge
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